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हरितलवक की संरचना का संक्षेप में वर्णन कीजिए

वह कोशिकांग जहाँ प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रिया सम्पन्न होती है, हरितलवक (chloroplast) कहलाता है। पेड़-पौधों के सभी हरे भागों तथा पत्तियों में हरितलवक पाया जाता है। उच्चश्रेणी के पादपों में हरितलवक पर्णमध्योतक कोशिकाओं (Mesophyle cells) में उपस्थित रहता है। पत्ती की एक कोशिका में 20-40 हरितलवक पाये जाते हैं। प्रत्येक हरितलवक लाइपोप्रोटीन की दो एकक झिल्लियों (unit memberanes) द्वारा घिरा रहता है। इन दोनों झिल्लियों के मध्य परिकला अवकाश पाया जाता है। बाह्यकला प्रोटॉनों के प्रति पारगम्यता तथा आन्तरिक कला प्रोटॉनों के प्रति अपारगम्य होती है। हरितलवक के दो आन्तरिक भाग होते हैं, जिन्हें ग्रेना (Grana) एवं स्ट्रोमा (Stroma) कहा जाता है। स्ट्रोमा या पीठिका हरितलवक का मैट्रिक्स भाग होता है, जिसमें प्रोटीनयुक्त विषमांगी तरल पदार्थ विद्यमान रहते हैं। इसमें 70S राइबोसोम, द्विकुण्डलित DNA, आस्पियोफिलिक बूंदें घुलित लवण एवं एन्जाइम पाये जाते हैं।

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मेरुरज्जु (Spinal Cord)

मेरुरज्जु (Spinal Cord) मेडुला आब्लोगेटा का पिछला भाग मेरुरज्जु कहलाता है  मेरूरज्जु के चारो और भी मस्तिष्क के समान तीन स्तरों (ड्यूरामेटर, एरेकनायड,और पायमेटर) का आवरण पाया जाता है। मेरुरज्जु बेलनाकार, खोखली होती है। मेरुरज्जु के मध्य मै एक सकरी नाल पायी जाती है जिसे केंद्रीय नाल कहते है इस नाल में द्रव भरा होता है जिसे सेरिब्रोस्पाइनल द्रव कहते है। मेरुरज्जु के अंदर वाला भाग धूसर पदार्थ का तथा बाहरी स्तर को श्वेत पदार्थ का बना होता है। मेरुरज्जु के कार्य-- यह प्रतिवर्ती क्रियाओ का नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य करती है। यह मस्तिष्क से आने जाने वाले उद्दीपनों का संवहन करता है।