छठी शताब्दी ई. से सोने के सिक्के मिलने कम हो गए। क्या इससे यह संकेत मिलता है कि उस काल में कुछ आर्थिक संकट पैदा हो गया था? इतिहासकारों में इसे लेकर मतभेद है। कुछ का कहना है कि रोमन साम्राज्य के पतन के बाद दूरवर्ती व्यापार में कमी आई जिससे उन राज्यों, समुदायों और क्षेत्रों की संपन्नता पर असर पड़ा जिन्हें दूरवर्ती व्यापार से लाभ मिलता था। अन्य का कहना है, कि इस काल में नए नगरों और व्यापार के नवीन तंत्रों का उदय होने लगा था। उनका यह भी कहना है कि यद्यपि इस काल के सोने के सिक्कों का मिलना तो कम हो गया लेकिन अभिलेखों और ग्रंथों में सिक्के का उल्लेख होता रहा है। क्या इसका अर्थ यह हो सकता है कि सिक्के इसलिए कम मिलते हैं क्योंकि वे प्रचलन में थे और उनका किसी ने संग्रह करके नहीं रखा था।
सेरीकल्चर(Sericulture) किसे कहते है ।रेशम कीट का जीवन चक्र समझाइये। Ans- रेशम कीट को पालकर रेशम प्राप्त करने को सेरीकल्चर कहते है। रेशम कीट को शहतूत के पौधे की पत्तियों पर पाला जाता है यह कीट शहतूत की पत्तियां खाता है। रेशम कीट का जीवन चक्र- मादा रेशम कीट शहतूत की पत्तियों पर बहुत सारे अंडे देती है ।इन अंडो से इल्लियॉ या कैटरपिलर (लार्वा) निकलते है ।ये लार्वा शहतूत की पत्तियां खाकर बड़े हो जाते है ।इनके पास मकड़ी के समान धागा निकालने वाली ग्रन्थि होती है जिसे रेशम ग्रन्थि कहते है। ये लार्वा इस ग्रन्थि से पतला धागा निकाल कर अपने चारों ओर लपेट लेता है जिससे लार्वा रेशम के खोल में बंद हो जाता है इसे कोकुन(Cocoon) कहते है। कोकुन के अंदर का लार्वा प्यूपा कहलाता है ।बाद में कोकुन से वयस्क कीट बन जाता है । ओर पुनः यही जीवन चक्र शुरू हो जाता है। इससे रेशम प्राप्त करने के लिये कोकुन को गर्म पानी मे डाला जाता है जिससे इसके अंदर का प्यूपा मर जाता है और कोकुन से रेशम का धा...
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